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Cheque Bounce Case (Section 138 NI Act) 2026: Jail Kab Hoti Hai, Fine, Process aur Supreme Court Guidelines

 Cheque Bounce Case (Section 138 NI Act) 2026: Jail Kab Hoti Hai, Fine, Process aur Supreme Court Guidelines

जेल कब होती है, जुर्माना कितना लगता है, पूरी कानूनी प्रक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय के नवीन दिशा-निर्देश 
आज के समय में व्यापार, उधार और लेन-देन में चेक का उपयोग बहुत आम हो गया है। लेकिन जब दिया गया चेक बैंक से अदायगी न होने के कारण वापस आ जाता है, तो इसे आम भाषा में चेक बाउंस कहा जाता है।
भारत में चेक बाउंस से संबंधित मामलों को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत देखा जाता है।


इस लेख में हम जानेंगे कि
पूरी कानूनी प्रक्रिया क्या है
2026 तक सर्वोच्च न्यायालय के नवीन दिशा-निर्देश क्या हैं


चेक बाउंस क्या होता है?


जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को भुगतान के लिए चेक देता है और बैंक उस चेक को निम्न कारणों से वापस कर देता है, तो चेक बाउंस माना जाता है—

खाते में पर्याप्त धनराशि न होना
खाता बंद होना
हस्ताक्षर मेल न खाना
भुगतान रोक दिया जाना


यदि चेक कानूनी रूप से देय ऋण या देनदारी के लिए दिया गया हो, तभी धारा 138 लागू होती है।


धारा 138 के अंतर्गत मामला कब बनता है?



धारा 138 के अंतर्गत मामला बनने के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें होती हैं—



Picture Source :- kuchnyaa.in



चेक किसी वैध ऋण या देनदारी के भुगतान के लिए दिया गया हो
चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर अस्वीकृत हो गया हो
चेक बाउंस होने की सूचना मिलने के 30 दिनों के भीतर कानूनी नोटिस भेजा गया हो
नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर चेक राशि का भुगतान न किया गया हो
इसके बाद 30 दिनों के भीतर न्यायालय में परिवाद (शिकायत) दायर किया गया हो
यदि इनमें से कोई भी शर्त पूरी नहीं होती, तो मामला कमजोर हो सकता है।


कानूनी नोटिस का महत्व

कानूनी नोटिस धारा 138 का सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
यदि नोटिस समय पर नहीं भेजा गया या उसमें कानूनी त्रुटि है, तो पूरा मामला खारिज हो सकता है।



नोटिस में यह स्पष्ट होना चाहिए कि—


चेक किस तिथि का है
कितनी राशि का है
किस कारण से बाउंस हुआ
15 दिनों में भुगतान की मांग
चेक बाउंस मामले की पूरी प्रक्रिया
चेक बैंक में जमा किया जाता है
चेक बाउंस होने पर बैंक से सूचना मिलती है
30 दिनों में कानूनी नोटिस भेजा जाता है
15 दिन की प्रतीक्षा की जाती है
भुगतान न होने पर न्यायालय में मामला दायर होता है
न्यायालय द्वारा अभियुक्त को तलब किया जाता है
साक्ष्य और जिरह होती है
निर्णय सुनाया जाता है
चेक बाउंस मामले में जेल कब होती है?
यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है।



हर चेक बाउंस मामले में जेल नहीं होती


जेल तब हो सकती है जब—

अभियुक्त जानबूझकर भुगतान नहीं करता
न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करता है
बार-बार अवसर मिलने के बावजूद राशि जमा नहीं करता मामला अंतिम निर्णय तक जाता है और दोष सिद्ध हो जाता है


जेल आमतौर पर नहीं होती जब—

मामला समझौते से समाप्त हो जाता है
अभियुक्त समय पर राशि चुका देता है
प्रारंभिक चरण में मामला निपट जाता है
धारा 138 में अधिकतम दो वर्ष तक का कारावास या चेक राशि के दोगुने तक जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।


जुर्माना कितना लगता है?


न्यायालय परिस्थितियों के अनुसार—

केवल जुर्माना केवल कारावास या दोनों का आदेश दे सकता है। अधिकांश मामलों में न्यायालय जुर्माना लगाकर मामला समाप्त करना उचित समझता है।
समझौता (समाधान) की भूमिका चेक बाउंस मामला समझौता योग्य अपराध है।
यदि दोनों पक्ष सहमत हो जाते हैं और राशि का भुगतान कर दिया जाता है, तो मामला समाप्त किया जा सकता है। समझौता जितना जल्दी होगा, अभियुक्त को उतना ही अधिक लाभ मिलता है।



2025–26 तक सर्वोच्च न्यायालय के नवीन दिशा-निर्देश


सर्वोच्च न्यायालय ने चेक बाउंस मामलों को सरल और शीघ्र निपटाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं—


1. विलंब की स्वचालित माफी नहीं
यदि परिवाद समय सीमा के बाद दायर किया गया है, तो विलंब के लिए अलग से कारण बताना आवश्यक होगा।

2. शीघ्र कार्यवाही पर बल
न्यायालयों को निर्देश दिया गया है कि चेक बाउंस मामलों में अनावश्यक विलंब न हो।

3. प्रारंभिक स्तर पर समझौते को बढ़ावा
न्यायालयों को निर्देश है कि प्रारंभिक सुनवाई में ही समझौते की संभावना तलाशी जाए।

4. तकनीकी माध्यमों का उपयोग
नोटिस और तलब की प्रक्रिया में आधुनिक संचार साधनों को अपनाने पर जोर दिया गया है।

5. शीघ्र भुगतान पर राहत
यदि अभियुक्त प्रारंभिक चरण में ही राशि का भुगतान कर देता है, तो कठोर दंड से बचा जा सकता है।
कब वकील से संपर्क करना चाहिए?
जैसे ही चेक बाउंस का नोटिस मिले
या यदि आपने किसी को चेक दिया है और भुगतान संभव नहीं है

या यदि आप शिकायत दर्ज करना चाहते हैं
समय पर कानूनी सलाह लेने से मामला बिगड़ने से बच सकता है।


आपका हमारा लेख केसा लगेगा इसके बारे में हमें कमेंट बॉक्स में जानकारी अवश्य दें, या किसी भी शिकायत या सुझाव के लिए कमेंट बॉक्स में जाएं या Contact Us आइकन का प्रयोग करें 




चेक बाउंस मामला गंभीर अवश्य है, लेकिन हर स्थिति में जेल अनिवार्य नहीं है।
समय पर सही कदम उठाकर, कानूनी प्रक्रिया का पालन करके और आवश्यकता पड़ने पर समझौता करके इस मामले से बचा जा सकता है।
यदि आपको चेक बाउंस से संबंधित कोई समस्या है, तो तुरंत किसी अनुभवी अधिवक्ता से परामर्श लेना ही समझदारी है।

हमारे लेख से आपको केसा लगेगा कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं हमें आपके सुझाव का इंतजार रहता है।

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