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Police FIR दर्ज नहीं कर रही तो क्या करें? (2025 में कानूनी उपाय)

 

Police FIR दर्ज नहीं कर रही तो क्या करें? (2025 में कानूनी उपाय)


🔰 परिचय

भारत में अक्सर लोग थाने जाते हैं लेकिन पुलिस FIR दर्ज करने से मना कर देती है।

कभी कहती है – “मामला civil है”, कभी “ऊपर से आदेश नहीं है”।

ऐसे में आम आदमी परेशान हो जाता है।

👉 लेकिन कानून आपके साथ है।

अगर पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही, तो कानूनी रास्ते मौजूद हैं।





🔍 FIR क्या होती है?

FIR (First Information Report) वह पहली लिखित सूचना है, जो किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) के बारे में पुलिस को दी जाती है।

✔ FIR दर्ज होना आपका कानूनी अधिकार है

✔ पुलिस इसे मनमर्जी से मना नहीं कर सकती

⚖️ कानून क्या कहता है? (BNS / CrPC Position)

संज्ञेय अपराध में FIR दर्ज करना अनिवार्य है

पुलिस को जाँच से पहले FIR दर्ज करनी होती है|



📌 सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश:

“Police cannot refuse to register FIR if cognizable offence is disclosed.”

🚨 Police FIR दर्ज नहीं कर रही – तो STEP BY STEP क्या करें?

✅ Step 1: Written Complaint दें

अपनी शिकायत लिखित में दें

Date, time और receiving ज़रूर लें

अगर refuse करें → proof रखें

✅ Step 2: SP / SSP को शिकायत भेजें

अगर SHO FIR दर्ज नहीं करता, तो:

SP / SSP को registered post या email से complaint भेजें

IPC / BNS sections mention करें

Evidence attach करें



📌 कई मामलों में यहीं FIR दर्ज हो जाती है

✅ Step 3: Magistrate के पास Application (Section 156(3))

अगर SP level पर भी action नहीं होता:

Judicial Magistrate के सामने 156(3) CrPC / BNS equivalent की application

Magistrate police को FIR दर्ज करने का आदेश दे सकता है |

✔ यह सबसे effective legal remedy है

✅ Step 4: Online FIR / Online Complaint

कई राज्यों में:

Theft

Cyber crime

Missing person

के लिए online FIR की सुविधा है।



📑 FIR दर्ज कराने के लिए जरूरी दस्तावेज

Written complaint

Identity proof

Supporting evidence (photo, message, document)

Witness details (अगर हों)

❓ Frequently Asked Questions (FAQ)

❓ क्या पुलिस FIR दर्ज करने से मना कर सकती है?

👉 नहीं, अगर मामला संज्ञेय अपराध का है।

❓ FIR के बिना investigation हो सकती है?

👉 सामान्यतः नहीं। FIR जाँच की नींव है।

❓ FIR दर्ज कराने में कितने दिन लगते हैं?

👉 कानूनन तुरंत, लेकिन refusal पर legal process अपनाना पड़ता है।

❓ क्या वकील जरूरी है?

👉 Magistrate application में वकील होना बेहतर रहता है।

⚠️ ध्यान रखने योग्य बातें

झूठी FIR गंभीर अपराध है

सही facts और evidence दें

भावनाओं में गलत आरोप न लगाएँ

🧠 निष्कर्ष (Conclusion)

अगर पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही, तो डरने की जरूरत नहीं है।

कानून ने आपके लिए: ✔ SP complaint

✔ Magistrate remedy

✔ Online option 


यदि एक बार मामला न्यायालय के समक्ष पहुँच जाता है, तो न्यायालय पहले आपका पक्ष सुनेगा, उसके पश्चात पुलिस का पक्ष सुनेगा, और यदि न्यायालय को आपका पक्ष सही प्रतीत होता है, तो वह पुलिस को प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश देगा।



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