Ad2

(ISRO Spy Case – Nambi Narayanan Story: कैसे एक निर्दोष वैज्ञानिक नाम्बी नारायणन को झूठे आरोपों में जेल भेजा गया और 24 साल बाद मिला न्याय। पूरी जानकारी हिंदी में।

 

(ISRO) SPY CASE इसरो जासूसी कांड की सच्ची कहानी: कैसे एक निर्दोष वैज्ञानिक नाम्बी नारायणन को झूठे आरोपों में जेल भेजा गया और 24 साल बाद मिला न्याय।


“जब कोई निर्दोष व्यक्ति अपराधी बना दिया जाए, तब केवल उसकी नहीं, पूरे तंत्र की हार होती है।”

इसरो जासूसी कांड भारत के इतिहास का एक ऐसा काला अध्याय है, जिसमें विज्ञान, राजनीति, पुलिस तंत्र और मीडिया — सभी की विफलता एक साथ दिखाई देती है।

यह कहानी है वैज्ञानिक नाम्बी नारायणन की, जिन्होंने अपना पूरा जीवन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को समर्पित कर दिया, लेकिन बदले में उन्हें अपमान, जेल और 24 वर्षों की कानूनी लड़ाई झेलनी पड़ी।

यह केवल एक केस नहीं था, यह एक निर्दोष वैज्ञानिक की सामाजिक हत्या थी।

🔍 इसरो जासूसी कांड क्या था?

वर्ष 1994 में भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम एक अत्यंत महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा था।

भारत को क्रायोजेनिक इंजन तकनीक की आवश्यकता थी, जिससे भारी उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा जा सके।

इस तकनीक पर काम कर रहे प्रमुख वैज्ञानिकों में से एक थे — नाम्बी नारायणन।

अचानक केरल से एक सनसनीखेज़ समाचार सामने आया:

“इसरो के वैज्ञानिक देश की गोपनीय जानकारी पाकिस्तान को बेच रहे हैं।”

पूरे देश में हड़कंप मच गया।

जिस संस्थान को भारत की शान माना जाता था, उस पर देशद्रोह का आरोप लग गया।

👤 वैज्ञानिक नाम्बी नारायणन कौन थे?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वरिष्ठ वैज्ञानिक

द्रव प्रणोदन प्रणाली (Liquid Propulsion System) के विशेषज्ञ

फ्रांस से उन्नत अंतरिक्ष तकनीक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका

भारत के क्रायोजेनिक इंजन कार्यक्रम के स्तंभ

वे न तो राजनेता थे, न व्यापारी —

वे केवल एक वैज्ञानिक थे, जिनका सपना था कि भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने।

🚔 गिरफ्तारी और झूठे आरोप

अक्टूबर 1994 में केरल पुलिस ने नाम्बी नारायणन को गिरफ्तार कर लिया।

उन पर आरोप लगाए गए कि:

उन्होंने मालदीव की दो महिलाओं के माध्यम से

भारत की गोपनीय अंतरिक्ष तकनीक

पाकिस्तान को बेच दी

और इसके बदले विदेशी मुद्रा प्राप्त की

यह कहानी सुनने में जितनी फिल्मी लगती है, उतनी ही बिना आधार की थी।

वास्तविकता क्या थी?

कोई ठोस सबूत नहीं

कोई तकनीकी दस्तावेज़ नहीं

कोई बैंक लेन-देन प्रमाण नहीं

पूरे केस की नींव केवल एक कथित स्वीकारोक्ति पर रखी गई, जो बाद में यातना द्वारा कराई गई सिद्ध हुई।

😔 जेल, यातना और चरित्र हनन

नाम्बी नारायणन को:

जेल में डाला गया मानसिक और शारीरिक यातना दी गई मीडिया द्वारा “देशद्रोही वैज्ञानिक” घोषित कर दिया गया उनके परिवार पर क्या बीती? बच्चे विद्यालय जाना छोड़ने पर मजबूर हो गए पत्नी को समाज ने अलग-थलग कर दिया |

पड़ोसियों ने बातचीत बंद कर दी

यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, पूरे परिवार की सज़ा थी — बिना न्यायालय के।

🧠 मीडिया की भूमिका: न्याय या सनसनी?

उस समय अधिकांश मीडिया ने:

बिना जांच बिना प्रमाण पुलिस की कहानी को सच मान लिया अख़बारों की सुर्खियाँ बनीं —

“इसरो में जासूसी” “वैज्ञानिक देशद्रोही निकला”

किसी ने यह नहीं पूछा कि

सबूत कहाँ हैं?

⚖️ सीबीआई जांच: सच का खुलासा

जब मामला गंभीर होता गया, तब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को जांच सौंपी गई।

सीबीआई की जांच रिपोर्ट ने साफ कहा:

“इसरो जासूसी कांड पूरी तरह मनगढ़ंत है।”

जांच में पाया गया कि:

कोई जासूसी नहीं हुई

कोई गोपनीय जानकारी लीक नहीं हुई

वैज्ञानिक निर्दोष हैं

सीबीआई ने सभी वैज्ञानिकों को पूरी तरह निर्दोष घोषित कर दिया।

🏛️ सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय

वर्ष 1998 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

न्यायालय ने कहा:

नाम्बी नारायणन पूरी तरह निर्दोष हैं

केरल पुलिस की कार्यवाही दुर्भावनापूर्ण थी

वैज्ञानिक की प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुँचाई गई

न्यायालय ने यह भी स्वीकार किया कि

इस कांड से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुँचा।

💰 क्या मुआवज़ा न्याय दे सकता है?

वर्ष 2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने नाम्बी नारायणन को:

₹50 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया

और एक समिति गठित की, ताकि दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो

लेकिन प्रश्न आज भी बना हुआ है:

क्या पैसा 24 साल का अपमान लौटा सकता है?

क्या खोई हुई प्रतिष्ठा वापस आ सकती है?

🚀 इसरो को हुआ नुकसान

इस झूठे कांड के कारण:

भारत का क्रायोजेनिक कार्यक्रम वर्षों पीछे चला गया

विदेशी शक्तियों को भारत की कमजोरी का संकेत मिला

वैज्ञानिकों के मनोबल को गहरा आघात पहुँचा

एक झूठे मामले ने देश की वैज्ञानिक प्रगति को धीमा कर दिया।

🧠 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

हर आरोपी अपराधी नहीं होता

मीडिया का दायित्व सनसनी नहीं, सत्य है

पुलिस तंत्र पर निगरानी आवश्यक है

न्याय में देरी भी अन्याय है

📌 आज भी क्यों खोजी जाती है यह कहानी?

आज भी लोग इंटरनेट पर खोजते हैं:

इसरो जासूसी कांड क्या था

नाम्बी नारायणन की सच्ची कहानी

भारत का सबसे बड़ा झूठा केस

निर्दोष वैज्ञानिक की दर्दनाक कहानी

क्योंकि यह कहानी केवल अतीत नहीं है.


यह एक चेतावनी है।


✍️ निष्कर्ष

नाम्बी नारायणन ने कहा था:

“मैं लड़ रहा था, क्योंकि अगर मैं चुप रहता, तो आने वाली पीढ़ियों के वैज्ञानिक डर के साथ काम करते।”

यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं,

यह सच, साहस और संघर्ष की कहानी है।


Indian Express Source और दूसरे इंटरनेट सोर्सेस से यह जानकारी ली गई है इस आर्टिकल के बारे में कोई सुझाव देने के लिए आप कमेंट बॉक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं या कांटेक्ट अस में जाकर हमसे संपर्क करसकत हैं, 





No comments

Powered by Blogger.